इस अनोखे मंदिर में क्यों करते हैं बालों का दान, जाने क्या है इस दान के पीछे का रहस्य?

इस अनोखे मंदिर में क्यों करते हैं बालों का दान, जाने क्या है इस दान के पीछे का रहस्य?

तिरुपति मंदिर न केवल देश में बल्कि विदेशों में भी प्रसिद्ध है। इस मंदिर का कारण यह है कि इसे देश का सबसे धनी मंदिर कहा जाता है। तो इससे जुड़ी एक और मान्यता है जो इसे देश भर के अन्य मंदिरों से खास बनाती है। दरअसल, देश के सबसे अमीर मंदिर तिरुपति में बाल दान की एक लंबी परंपरा है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इस परंपरा से एक धार्मिक कहानी क्या जुड़ी है।

आज इस लेख में हम आपको इस परंपरा से जुड़ी पौराणिक कथा बताएंगे। तो आइए देर न करें, आइए जानते हैं धन के देवता कुबेर से जुड़े इस मिथक के बारे में। ऐसा कहा जाता है कि भगवान आपको एक भक्त जितना दान करते हैं उससे 10 गुना अधिक धन के रूप में देते हैं। तो यह भी कहा जाता है कि जो कोई भी यहां आकर अपने बाल दान करता है उसके जीवन पर देवी लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है। इस प्रसिद्ध मंदिर में न केवल पुरुष बल्कि महिलाएं भी अपना मानसिक कार्य पूरा करने के बाद अपने बाल दान करती हैं।

जाने इस मान्यता से जुड़े कहानी: प्राचीन काल में विग्रह पर बालाजी चींटियों का पहाड़ बन गए थे। तभी एक गाय थी, जो चीटियों के पहाड़ को दुह रही थी। जब उसके मालिक को इस बात का पता चला तो वह अपनी गाय पर बहुत क्रोधित हुआ और एक दिन उसने गाय के सिर पर कुल्हाड़ी से वार कर दिया। इस वार से बालाजी के कई बाल झड़ गए।

तब माता नीला देवी ने अपने बाल काटकर बालाजी के घाव पर लगा दिए। पौराणिक कथाओं के अनुसार नील देवी ने घाव पर केश लगाया और उसका घाव तुरंत भर गया। इससे प्रसन्न होकर नारायण ने कहा कि बाल शरीर की सुंदरता का सबसे महत्वपूर्ण अंग है और देवी आपने मेरे लिए इसे बलिदान किया है। इसलिए अब से जो कोई मेरे लिए अपने बाल बलिदान करेगा, मैं उसकी हर इच्छा पूरी करूंगा।

कहा जाता है कि इस घटना के बाद से बालाजी के मंदिर में बाल दान करने की प्रथा शुरू हो गई थी। इस मान्यता से जुड़े अन्य मिथकों के अनुसार, इस दान के माध्यम से भगवान वेंकटेश्वर कुबेरजी से लिए गए ऋषि को वापस कर देते हैं।

ऐसा माना जाता है कि जो व्यक्ति इस मंदिर में आता है और अपने जीवन के दोषों को त्याग कर अपने बालों को त्याग देता है, माँ लक्ष्मी उसके जीवन से सभी प्रकार के दुखों को दूर कर देती है।

admin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *