बाबा खाटू श्याम का ‘शीश’ राजस्थान में मौजूद, लेकिन ‘शरीर’ कहां है?

राजस्‍थान सीकर जिले के खाटू कस्‍बे में खाटूश्‍यामजी का सालाना फाल्‍गुन लक्‍खी मेला 11 मार्च 2024 से शुरू हो चुका है। मेले में करीब 30 लाख से ज्‍यादा श्‍याम भक्‍त पहुंचने का अनुमान है।

शीश के दानी, हारे का सहारा व लखदातार बाबा श्‍याम का सालाना फाल्‍गुन लक्‍खी मेला राजस्‍थान के सीकर जिले के खाटू कस्‍बे में 11 मार्च 2024 से शुरू हो चुका है।

श्री श्‍याम मंदिर कमेटी की ओर से वीआईपी दर्शनों की व्‍यवस्‍था बंद कर दी गई है। सभी श्‍याम भक्‍तों का समान तरीके से लाइन में लगकर दर्शन करने होते हैं।

खाटू में मुख्‍य मेला 21 मार्च को एकादशी पर भरेगा। इस दौरान कोन-कोने से लाखों श्‍याम भक्‍त खाटू पहुंचेंगे और बाबा श्‍याम के दर्शन कर उनके दरबार में धोक लगाएंगे।

लक्‍खी मेले के अलावा खाटूश्‍यामजी में हर माह शुक्‍ल पक्ष की एकादशी को भी आस्‍था का सैलाब उमड़ता है। यही हाल बाबा श्‍याम के जन्‍मोत्‍सव व नववर्ष पर देखने को मिलता है।

कहा जाता है कि खाटू कस्‍बे में स्थित श्‍यामकुंड में सदियों पहले बाबा श्‍याम का शीश मिला था, जिसकी वर्तमान में पूजा होती है। इसी वजह से खाटू में‍ ही बाबा श्‍याम का लक्‍खी मेला भरता है।

खाटूश्‍यामजी में श्‍याम भक्‍तों के लिए ठहरने की उत्‍तम व्‍यवस्‍थाएं हैं। खाटूश्‍यामजी मंदिर के पांच किलोमीटर के दायरे में करीब 20 होटल, 400 गेस्‍ट हाउस और 600 धर्मशालाएं हैं।

खाटूश्‍यामजी मंदिर में सिर्फ फूल, फूलमालाएं, मोर छड़ी (मोर पंख), इत्र की शीशी, प्रसाद चढ़ाने की ही अनुमति है। मंदिर परिसर में ही बॉक्‍स लगाए गए हैं, जिनमें ये सब चीजें बाबा श्‍याम नाम से चढ़ाई जा सकती हैं।