रोटी, चावल, ब्रेड, बीन्स, आलू, ओट्स, आलू आदि कार्बोहाइड्रेट के सोर्स हैं जो इंडियन डाइट में जरूर शामिल होते हैं. नाश्ता से लेकर रात के खाने तक इंडियन खाने में कार्बोहाइड्रेट ही सबसे अधिक होता है.कार्ब लोडेड होती है

कार्बोहाइड्रेट एक बेसिक पोषक तत्व है जिसे आपका शरीर ग्लूकोज या ब्लड शुगर में बदलता है ताकि आपके शरीर को काम करने के लिए एनर्जी मिल सके.

अब ऐसे में कई लोग वजन कम करने के लिए कार्बोहाइड्रेट का सेवन करना बंद कर देते हैं. कार्ब्स न खाने से शरीर पर क्या असर होता है, इस बारे में जान लीजिए.

कार्ब्स की अचानक कमी से आपका वजन कम हो जाएगा. हालांकि इस वेट में से काफी सारा वजन शरीर में मौजूद पानी का होता है. ऐसा ज्यादातर इसलिए होता है क्योंकि कार्ब्स कम करने से आपके मसल्स में मौजूद ग्लाइकोजन स्टोरेज खत्म हो जाता है जो शरीर में पानी को रोककर रखता है.

कार्ब्स कम करने से शरीर से सोडियम (नमक) भी कम हो जाता है जिससे पानी बाहर निकल जाता है. जब आप फिर से कार्ब्स खाना शुरू करते हैं तो वॉटर वेट तुरंत बढ़ जाता है.

कार्ब कम खाने से शरीर केटोसिस स्थिति में चला जाता है जिससे कमजोरी, थकान, चक्कर आना और सिरदर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं. इससे पेट दर्द, मतली और उल्टी जैसे लक्षण दिख सकते हैं.

जब आपका शरीर ब्लड शुगर के लेवल को समान्य रखने की कोशिश करता है तो आपको धुंधलापन हो सकता है. कभी-कभार सोने में भी मुश्किल, थकान हो सकती है और वहीं ब्रेन फॉग की भी शिकायत हो सकती है.

लो कार्ब वाले फूड्स में फाइबर भी कम होता है इस कारण कब्ज हो सकती है या पेट में बनने वाली गैस पाचन तंत्र को बिगाड़ सकती है. आपके पेट में गैस महसूस होगा और दर्द महसूस हो सकता है.

यदि आप अच्छी तरह से हाइड्रेटेड रहते हैं और पर्याप्त इलेक्ट्रोलाइट्स लेते हैं तो आपके लक्षण अधिक समय तक नहीं रहेंगे.

जब आपका शरीर कार्ब्स के बजाय फैटी एसिड पर चलता है तो यह आपकी सांस के माध्यम से एसीटोन के रूप में कीटोन्स छोड़ता है. इससे आपकी सांसों से फल या मीठी गंध आ सकती है.

कुछ लोग कहते हैं कि मुंह से आने वाली दुर्गंध का स्वाद सड़े हुए सेब जैसा होता है. इसके अलावा यदि आपका मुंह सूखा है तो आपकी सांसों से भी दुर्गंध आ सकती है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि आपके मुंह में बैक्टीरिया से लड़ने के लिए लार नहीं है.

लो-कार्ब डाइट से आपका ब्लड शुगर लेवल कम हो सकता है. यदि आपको डायबिटीज है तो भी आपको कुछ मदद मिल सकती है. लेकिन बिल्कुल कार्ब कम करने से हाइपोग्लाइसीमिया का जोखिम हो सकता है. ऐसा तब होता है जब आपका ब्लड शुगर बिल्कुल कम हो जाए

इसके लिए रोजाना की डाइट में कम से कम 15 ग्राम कार्ब्स जरूर शामिल करें. यदि आपको डायबिटीज है तो अपने ब्लड शुगर की समय-समय पर जांच करते रहें.