हिंदू धर्म में दान करना बहुत ही पुण्य का काम माना जाता है. कई बार लोग मन की शांति, मनोकामना और घर की परिवार की खुशी के लिए दान करते हैं.

वहीं, कई बार ऐसा भी होता है जब दान करने के लिए विवश कर दिया जाता है. यानी इच्छा नहीं होने के बावजूद दान देना पड़ जाता है.

प्रेमानंद महाराज ने हाल ही में बताया है कि अगर किसी मंदिर या पूजा स्थल पर जबरन दान मांगा जाए तो क्या करना चाहिए.

प्रेमानंद महाराज से जब एक भक्त पूछता है, "जैसे हम मंदिर में जाते हैं तो वहां हमें कहा जाता है कि इतना रुपया दान कीजिए. अगर हम नहीं देते हैं तो पाप तो नहीं लगता है ना?"

इसका जवाब देते हुए प्रेमानंद महाराज कहते हैं, ''नहीं. बिल्कुल नहीं. जिनके तुम दर्शन करने गए हो वो खुद लक्ष्मी पति हैं. उनकी सेवा में हमलोग हैं.''

प्रेमानंद महाराज कहते हैं कि सच यह है कि भगवान को तुमसे कुछ नहीं चाहिए. हम भी किसी को एक कौरा नहीं देते हैं.

प्रेमानंद महाराज कहते हैं, "हमारे पास भोजन है. हमारा परिवार भोजन कर लेता है. हम किसी को नहीं देते है. इसमें कोई परेशानी नहीं है.'

प्रेमानंद महाराज कहते हैं कि परिवार भी भगवान का ही स्वरूप है. हम मेहनत करते हैं तब परिवार का भरण-पोषण होता है.