बाप रे, भारत के इस गांव में चीजों की कीमत जानकर आपके पसीने छूट जाएंगे, एक किलो नमक बिक रहा है सोने-चाँदी के भाव में

बाप रे, भारत के इस गांव में चीजों की कीमत जानकर आपके पसीने छूट जाएंगे, एक किलो नमक बिक रहा है सोने-चाँदी के भाव में

देश में महंगाई दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। यही वजह है कि आज हर कोई आम जरूरी चीजों के लिए भी काफी मेहनत कर रहा है। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि भारत में कुछ गांव ऐसे भी हैं जहां महंगाई के सारे रिकॉर्ड टूट चुके हैं।

ये हाल है भारत-चीन सीमा पर बसे गांवों का, जहां महंगाई आसमान छू रही है। स्थिति यह है कि बरफू, लस्पा और रालम ग्राम सभाओं में भी दैनिक जरूरत का सामान 6-8 गुना महंगा बिक रहा है। मुनस्यारी में जो नमक 20 रुपये किलो बिक रहा है, वही नमक सीमावर्ती गांवों में रहने वाले लोग 130 रुपये किलो के हिसाब से खरीदने को मजबूर हैं।

यहां अन्य राशन की कीमत समान है। महंगाई का आलम यह है कि प्याज 125 रुपये किलो बिक रहा है, जबकि सरसों का तेल 275 रुपये किलो तक पहुंच गया है। इसके अलावा दाल और चीनी की कीमत 200 रुपये प्रति किलो और 150 रुपये प्रति किलो है।

इन गांवों में महंगाई बढ़ने के कुछ मुख्य कारण इस प्रकार देखे जा सकते हैं:

कोरोना महामारी के बाद श्रमिकों ने अपनी मजदूरी लागत को दोगुना कर दिया है। जहां साल 2019 में किराया 40 से 50 रुपये प्रति किलो था, लेकिन अब इसे घटाकर 80 से 120 रुपये कर दिया गया है।

पैदल चलने वालों की सड़कें टूटी हुई हैं। जिससे लगभग सभी आवश्यक सामान घोड़ों और खच्चरों से खरीदना पड़ता है। पहले लोग अपना सामान पैदल ही लाते थे।

इसके अलावा महामारी के कारण कम कीमतों पर काम करने वाले नेपाली मूल के कामगारों की संख्या में भी काफी कमी आई है। नेपाली मजदूरों के न आने से कीमतें भी बढ़ गई हैं।

आपको बता दें कि हर साल मार्च से नवंबर तक इन तीन ग्राम सभाओं के 13 से अधिक छोटे गांवों से लोग भारत-चीन सीमा पर पलायन करते हैं। इसके साथ ही सैनिक कई सैन्य चौकियों से भी नीचे आते हैं, इसलिए वे सीमा प्रहरी भी हैं। उबड़-खाबड़ सड़कें और कोरो महामारी के चलते इस बार पलायन कर चुके ग्रामीण महंगाई से काफी परेशान हैं। यहां सड़क से करीब 52 से 73 किलोमीटर दूर रहने वाले ग्रामीणों का कहना है कि अगर सरकार उनकी समस्या का समाधान नहीं कर पाई या उनके लिए उचित व्यवस्था नहीं की गई तो भविष्य में पलायन मुश्किल हो जाएगा।

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